झारखंड में समय के पहले लोकसभा के साथ ही कराए जा सकते हैं विधानसभा चुनाव

झारखंड चुनाव

झारखंड में विधानसभा के चुनाव समय के पहले 2024 के अप्रैल-मई में संभावित लोकसभा चुनाव के साथ ही कराए जा सकते हैं राज्य में सत्ताधारी गठबंधन की अगुवाई करने वाले झामुमो और प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा ने अपने नेताओं-कार्यकर्ताओं को समय पूर्व चुनाव की संभावनाओं के मद्देनजर अलर्ट करना शुरू कर दिया है झारखंड की पांचवीं विधानसभा का कार्यकाल 5 जनवरी 2025 को पूरा हो रहा है यानी सामान्यतः अगले चुनाव का शेड्यूल अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच है

लोकसभा के साथ अप्रैल-मई में चुनाव की संभावनाओं की सुगबुगाहट प्रशासनिक हलकों में भी सुनाई पड़ रही है 4 जुलाई को झामुमो की सेंट्रल कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं को अलर्ट करते हुए कहा, “हमारा विरोधी हर वक्त चुनावी मोड में रहता है उनके पास संसाधन भी है और चालाकी भी वह कब किस हद तक जा सकते हैं, अंदाजा नहीं लगाया जा सकता इसलिए क्षेत्र में जाएं हमारी सरकार की उपलब्धियां जनता को बताएं, जाहिर है सोरेन को भी अंदाजा है.

विधानसभा के चुनाव तय समय के छह-सात महीने पहले ही कराए जा सकते हैं उन्होंने विरोधी यानी भाजपा की जिस ‘चालाकी’ की चर्चा की, उसका संकेत यही निकाला जा रहा है झामुमो सेंट्रल कमिटी की बैठक में तय हुआ कि पार्टी चुनावी मोड में काम करेगी सेंट्रल कमिटी का विस्तार लंबे समय से पेंडिंग था निर्णय लिया गया कि अगले पंद्रह दिनों के अंदर नई कमेटी घोषित कर दी जाएगी इसके अलावा 50 लाख सदस्य बनाने, पार्टी की उपलब्धियां बताने के लिए पार्टी की ओर से प्रखंड से लेकर पंचायत स्तर तक शिविर लगाने का निर्णय लिया गया.

इधर, भाजपा पहले ही चुनावी मोड में आ चुकी है अब विधानसभा स्तरीय सम्मेलनों का सिलसिला शुरू हो रहा है 9 जुलाई को हजारीबाग जिले के बरही में भाजपा के विधानसभा स्तरीय सम्मेलन में पार्टी के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनाव के लिए तैयार रहें दोनों चुनाव एक साथ कराए जाने की स्थिति बन सकती है.

भाजपा ने पिछले ही हफ्ते राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी को राज्य में पार्टी का नया अध्यक्ष बनाया है उनके अध्यक्ष बनने की संभावनाएं पिछले छह-आठ महीने से व्यक्त की जा रही थीं वह राज्य की मौजूदा हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार पर लगातार हमलावर हैं कोई दिन ऐसा नहीं होता, जब वे सीधे हेमंत सोरेन पर हमला नहीं बोलते चुनाव के दिनों में विरोधियों पर आक्रमण के लिए नेता जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वह नजारा मरांडी के ट्विटर हैंडल पर रोज देखा जा सकता है.

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